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history of computer in hindi | दुनिया में Computer का विकास - Abhinav Tiwari


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भारत में पूर्ण रूप से कंप्यूटर का योग सन 1990 के बाद से प्रारंभ हुआ परंतु आज हम Computer के भारत में हुए विकास को जानेंगे की भारत में Computer की योग का विकास कब से प्रारंभ हुआ पहला कंप्यूटर कब आया Personal Computer भारत में कब से आए इन सभी बारे में आज हम विस्तृत से जानेंगे।


Table of Contents


Computer का हिंदी नाम क्या है ? 

यह बात तो आपको पता ही होगी कि Computer एक अंग्रेजी शब्द है परंतु हम Computer को संस्कृत और हिंदी में क्या कहते हैं यह बात जानना भी बहुत जरूरी है क्योंकि यह ना अन्य शब्दों से बिल्कुल अलग है


दुनिया में Computer का विकास कब प्रारंभ हुआ ?

Computer बीसवीं सदी की देन है और इसी कारण इसके विकास का इतिहास अधिक पुराना नहीं है लेकिन यदि Computer के कार्य करने की विधि व इसके अविष्कार के पीछे मानव का उद्देश्य देखा जाए तो इसका इतिहास उतना ही पुराना है जितना कि मानव सभ्यता का इतिहास है, अगर हम यहां पर बात करें कि दुनिया में सबसे पहले Computer के रूप में कौन से यंत्र का इस्तेमाल किया गया था तो उसका नाम है,


अबेकस (Abakas)

वैज्ञानिकों की धारणा है कि विश्व का प्रथम गणना यंत्र अबेकस था जिसका विकास आज से लगभग 500 वर्ष पूर्व चीन में हुआ था यह यंत्र लगभग 150 वर्ष तक अधिक प्रचलित ना हो सका लेकिन उसके बाद इतना प्रचलित हुआ कि यह आज भी विश्व के कुछ देशों में प्रयोग किया जाता है हम में से कुछ लोगों ने अपनी प्राथमिक शिक्षा ग्रहण करते समय इसका उपयोग किया है अभी का एक छोटा सा उपकरण होता है जिसमें एक लकड़ी के बने प्रेम के बीच में तारों के बीच में कुछ मोतियों को पिरोया जाता है इसी अंतर से संख्याओं की गणना की जाती है और गुणा भाग भी आसानी से हो जाता है,


अब हम बात करें विश्व के दूसरे Computer के रूप में इस्तेमाल किए जाने वाले यंत्र की तो उसका नाम है ।



यांत्रिक गणक (mechanical calculator) :

अबेकस के काफी ज्यादा फेमस हो जाने के बाद 1642 में फ्रांस के एक प्रसिद्ध गणितज्ञ ब्लेज़ पास्कल ( Blaise Pascal ) ने एक यांत्रिक गणक का विकास किया जिसकी सहायता से अपने पिताजी का व्यापार में लेखा-जोखा संभालने के लिए गणना किया करते थे यह यंत्र संख्याओं को जोड़ का घटा भी सकता था इस यंत्र की बनावट कुछ जटिल थी और इसके अंदर के दावेदार वक्र का प्रयोग किया जाता था, वह वक्र आपस में जुड़े हुए थे और इन्हें एक हैंडल की सहायता से घुमाया जाता था। हैंडल को एक दिशा में घुमाने से संख्याओं का जोड़ प्राप्त होता था. और विपरीत दिशा में घुमाने से संख्याओं को हटाया जा सकता था आज के समय के छात्रों ने इस सिद्धांत को आज भी कुछ उपकरण जैसे मोटर वाहनों में आने वाले स्पीडोमीटर के रूप में इस्तेमाल किया जाता है पास्कल की मशीन में कुछ कमियां भी थी जिसे कारण उसमें गुणा भाग संभव नहीं था,


दुनिया का पहला इलेक्ट्रॉनिक Computer कौन सा है ?

सन 1945 में J. Presper Eckert एवं John Mauchly ने एनिक (Electronic Numerical Integrator and Computer) का आविष्कार किया था. इसे उन्होंने university of Pennsylvania में स्थापित किया था,इसे बनाने में आने वाला खर्च अमेरिका की सेना द्वारा किया गया था.



आधुनिक Computer के जनक कौन है ?

पहले के समय में भी जो परिणाम प्राप्त होते थे, उन्हें  संभाल कर रखा जाना संभव था मूलतः चार्ल्स बैबेज ने एक पूर्व भंडारित प्रोग्राम का विचार सामने रखा था, जिसे आज भी Computer में उपयोग किया जाता है इसी कारण चार्ल्स बैबेज (Charles Babbage) को आधुनिक Computer का जनक कहा जाता है। 



Charles Babbage

फादर ऑफ कंप्यूटर किसे कहा जाता है?

the Analytical Engine जोकि Computer युग का पहला Computer माना जाता है, और इसे बनाने में Charles Babbage का योगदान था ,इसी कारण चार्ल्स बैबेज को फादर ऑफ Computer कहा जाता है।



Computer की आवश्यकता क्यों पड़ी ?

Computer अत्यंत कम समय में बड़े से बड़े गणित की समस्याओं को आसानी से हल करने में सक्षम था जिसके कारण लोगों के बीच इसकी लोकप्रियता ज्यादा होती गई, 


प्रारंभ में Computer का इस्तेमाल क्यों किया जाता था ?

प्रारंभ में Computer का इस्तेमाल सिर्फ और सिर्फ जोड़ने और घटाने के लिए किया जाता था धीरे-धीरे इसमें गणित से जुड़ी सभी समस्याओं को समाधान करने के लिए इस्तेमाल में लिया जाने लगा धीरे धीरे समय के साथ बदलाव होते गए और मेमोरी में डाटा स्टोर करना और अन्य खास बजाओ की वजह से यह प्रसिद्ध होने लगा और इस तरह से एक टेक्नॉलॉजी युग की शुरुआत हुई।


दुनिया का पहला Computer कौन सा है ?

अगर अब हम बात करते हैं इस दुनिया के पहले Computer के बारे में


एनालिटिकल इंजन :

इंग्लैंड के एक प्रसिद्ध वैज्ञानिक चार्ल्स बैबेज ने सन 1863 में एक ऐसे डिजाइन को तैयार किया जो परिकलन यंत्र का कार्य तो करता ही था आंकड़ों को भंडारित भी रखता था इस यंत्र का नाम एनालिटिकल इंजन रखा गया,

इस यंत्र को बनाने में इंग्लैंड की सरकार ने इनकी काफी आर्थिक सहायता भी की यह यंत्र बहुत ही जटिल था और उस में आने को यांत्रिक घटक लगे हुए थे इस यंत्र में कुछ कमियां रह गई जिसके कारण उसे अधिक इस्तेमाल में नहीं लाया जा सका क्योंकि इसमें पूरी तरह से शुद्ध परिणाम नहीं मिल पाते थे चार्ल्स बैबेज ने अपने जीवन काल में इस मशीन को पूरे तरह से नहीं बना पाए और 1871 में उनका देहांत हो गया,


चार्ल्स बैबेज की मृत्यु के पश्चात लेडी लवलेश इंग्लैंड की ने एक प्रसिद्ध कवि लॉर्ड वेवल की पुत्री प्रवेश के एस अधूरे इंजन का काम पूरा किया,जिनका नाम एडा अगस्ता (Ada Augusta ) था। लेडी एडा अगस्ता एक अनुभवी गणितज्ञ थी जिन्होंने एक नए नंबर प्रणाली भी विकसित की इस प्रणाली को द्विआधारी गरण पद्धति कहते हैं एडिंग रन पद्धति से ही वापिस की मशीन को एक निश्चित प्रोग्राम के अनुसार नियंत्रित करना चाहती थी वह इस कार्य में काफी सफल रही और इस तरह वे विश्व की पहली व्यक्ति जिन्होंने प्रोग्राम की विधि का प्रयोग  किया,

एनालिटिकल इंजन एक स्वचालित मशीन थी और वह काफी तेज गति से गणना करने मैं सक्षम थी वह 1 मिनट में 60 से अधिक जोड़ करने में सक्षम थी गणित के किसी प्रश्न को हल करने के लिए आवश्यक निर्देश इस मशीन में पहले ही भरे जा सकते थे,


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Computer की पीढ़ियां 

यहां पर हम Computer की पीढ़ियों के बारे में संक्षिप्त में जान लेते हैं की कौन सी पीढ़ी कब से कब तक चली और उन में क्या परिवर्तन देखने को मिले: 


प्रथम पीढ़ी - 1946 से 1956

एनिक (ENIAC- Electronic Discrete Variable AutoMatic Computer) नामक Computer के निर्माण से ही Computer की प्रथम पीढ़ी का प्रारंभ हो गया। 



द्वितीय पीढ़ी - 1956 से 1964

द्वितीय पीढ़ी की शुरुआत Computer में ट्रांजिस्टर का उपयोग करने से हुई,इस पीढ़ी के Computer में वैक्यूम ट्यूब का प्रयोग किया जाता था, ट्रांजिस्टर के उपयोग ने Computerों को वेक्यूम ट्यूब के अपेक्षा  ज्यादा गति प्रदान की।


तृतीय पीढ़ी - 1964 से 1971

इस पीढ़ी ने Computerों को आईसी प्रदान की IC अर्थात Integrated circuit प्रदान की जोकि ट्रांजिस्टर के मुकाबले बेहतर थी, इस पीढ़ी के प्रमुख Computer ICL 1900, UNIVAC 1108  थे। 


चतुर्थ पीढ़ी - 1971 से वर्तमान

पीढ़ी के Computerों में चिप का इस्तेमाल होता था, जिसे large integrated circuit कहा जाता है अब लगभग 3 लाख ट्रांजिस्टर के बराबर का परिपथ 1 इंच के चौड़ाई भाग में समाहित हो सका, इस अविष्कार से पूरी सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट एक छोटी सी चिप में आ गई जिसे माइक्रो प्रोसेसर कहा जाता है.


पंचम पीढ़ी - वर्तमान और भविष्य

वर्तमान में इस्तेमाल में लिया जाने वाली सभी Computerों को हम पंचम पीढ़ी में रखते हैं इस पीढ़ी में Computer आकार में छोटे हो चुके हैं और छोटे से छोटे काम से लेकर बड़े से बड़े काम में इस्तेमाल में लिए जा रहे हैं, इंटरनेट Computer में अब बहुत अहम माध्यम बन चुका है।



भारत में पहला Computer 

भारत में पहला Computer 1952 में भारतीय सांख्यिकी संस्थान (Indian Statistical Institute) कोलकाता मैं जादवपुर यूनिवर्सिटी से हुई थी। सन 1952 में एक एनालोंग Computer की स्थापना की गई थी जो भारत का प्रथम Computer था। यह ट्रांजिस्टर पर काम करता था।



भारत में पहला सुपर Computer कौन सा था ?

PARAM 8000 भारत का पहला सुपर Computer था यह 1991 में बनाया गया था इसका इस्तेमाल मुख्यता मौसम विभाग में किया जाता था ,इस Computer को डॉ विजय पांडुरंग भटकर की उपस्थिति में बनाया गया था 


Computer को हिंदी में क्या कहते है : 

Computer को हिंदी में और संस्कृत में  संगणक अभिकलित्र कहा जाता है 



History of computer FAQ


  • लैपटॉप का आविष्कार किसने किया ?

laptop को वैज्ञानिक Adam Osborne ने सन 1981 में बनाया , इसका नाम Osborne 1  था । 


  • भारत का पहला  इलेक्ट्रॉनिक Computer का नाम 

भारत में लगभग 1966 तक एक भी Computer का निर्माण नहीं किया गया था परंतु भारत में सबसे पहले Computer सन 1952 में Dr.Dwijesh Dutta की अध्यक्षता में कोलकाता में लाया गया था.

 

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